Wednesday, June 9, 2010

आहट सी कोई आये तो लगता है की तुम हो
साया कोई लहराए तो लगता है की तुम हो

जब शाख कोई हाथ लगाते ही चमन में
शरमाए लजत जाए तो लगता है की तुम हो

रस्ते के धुंधलके में किसी मोड़ पे कुछ दूर..
इक लव सी चमक जाए तो लगता है की तुम हो

संदल से महकती हुई कुर्बेफ़ हवा का
झोंका कोई टकराए तो लगता है की तुम हो

ओढ़े हुए तारों की चमकती हुई चादर
नदिया कोई बलखाये तो लगता है की तुम हो

जब रात कोई देर किरन मेरे बराबर
चुपचाप से सो जाए तो लगता है की तुम हो
 

- जान  निसार  अख्तर


1 comment:

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