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Wednesday, April 6, 2011

तू क्या है

हर एक बात पे कहते हो तुम के 'तू क्या है'
तुम ही कहो के यह अंदाजे-गुफ्तगू क्या है

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख़ जुस्तजू क्या है

न शोलें में यह करिश्मा न बर्क में ये अदा
कोई बताओ के वोह शोखे -तुन्द खू क्या है

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

रही न ताक़ते-गुफ्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है

वोह चीज़ जिसके लिए हमको हो बहिश्त अज़ीज़
सिवाए बाड़े -गुल फामे-मुश्कबू  क्या  है

यह रश्क है के वो होता है हम सुखन तुमसे
वगरना खौफे-बाद आमोज़ी-ए-अदू क्या है

हुआ है शाह का मुसाहिब फिरे है इतराता
वगरना शहर में 'ग़ालिब' की आबरू क्या है

-ग़ालिब

Sunday, August 29, 2010

गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी..

गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी..
                                     गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...
             यह नजराना तेरा भी है और मेरा भी...

अपने गमको गीत बनाकर गा लेना..
अपने गमको गीत बनाकर गा लेना..
राग पुराना तेरा भी है... मेरा भी..
राग पुराना तेरा भी है.. मेरा भी..
गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...

                                   तू मुझको और मैं तुझको समझाऊ क्या..
तू मुझको और मैं तुझको समझाऊ क्या..
                                  दिल दीवाना तेरा भी है.. मेरा भी.. 
दिल दीवाना तेरा भी है.. मेरा भी..
              गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...

शहर में गलियों-गलियों जिसका चर्चा है..
शहर में गलियों-गलियों जिसका चर्चा है..
वो अफसाना तेरा भी है.. मेरा भी..

                                  मयखाना की बात ना कर वाइज मुझसे..
                                  आना-जाना तेरा भी.. मेरा भी..
                                  गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...

यह नजराना तेरा भी है और मेरा भी... 
            गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...