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Monday, August 15, 2011

शहजाद

गुल  खिले  चाँद  रात  याद  आई 
आपकी  बात  बात  याद  आई

एक  कहानी  की  हो  गयी  तकमील 
एक  सावन  की  रात  याद  आई

अश्क  आँखों  में  फिर  उमड़  आये 
कोई  माज़ी  की  बात  याद  आई

उनकी  महफ़िल  से  लौट  कर  'शहजाद'
रौनक -ए -कायनात  याद  आई

Monday, August 8, 2011

चला गया ...

दयार-ए-दिल की रात में चराग सा जला गया 
मिला नहीं तो किया हुआ वो शक्ल तो दिखा गया

जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिया
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया

यह सुबहओं की सफेदिया यह दोपहर की जर्दिया
अब आईने में देखता हूँ में कहाँ चला गया  

वो दोस्ती तो खैर अब नसीब-ए-दुश्मन हुई
वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया 

यह किस खुशी की रीत पर ग़मों को नींद आ गई
वोह लहर किस तरफ गई यह में कहाँ समां गया

Tuesday, January 5, 2010

आँखों को इंतज़ार का

आँखों को इंतज़ार का, दे के हुनर चला गया
चाहा था एक शख्स को, जाने किधर चला गया

दिनकी वो महफिलें गयी, रातों के रत जगें गए
कोई समेट कर मेरे, शामो सहर चला गया

झोंका है एक बहार का, रंग-ए-ख्याल-ए-यार भी
हरसू बिखर बिखर गयी खुशबू, जिधर चला गया

उसके ही दम से दिल में आज, धुप भी चांदनी भी है
दे के वो अपनी याद के, शम्सो क़मर चला गया

कूचा-ब-कूचा दर-ब-दर, कब से भटक रहा है दिल
हमको भुला के राह वो, अपनी डगर चला गया


Sunday, December 13, 2009

यूँ सजा चाँद



यूँ सजा चाँद के छलका तेरे अंदाज का रंग
यूँ फिज़ा महकी के बदला मेरे हमराज का रंग

साया-ए-चश्म में हैरां रुख-ए-रोशन का जमाल
सुर्खि-ए-लब में परीशां तेरी आवाज का रंग

बे पिए हूँ के अगर लुत्फ़ करो आखिर-ए-शब
शीशा-ओ-मय में ढलें सुबह के आगाज का रंग

चंग-ओ-नै, रंग पे थे अपने लहू के दम से
दिल ने लय बदली तो मद्धम हुआ हर साज का रंग

- फैज़ अहमद फैज़

नासिर

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी, अब याद आया

आज मुश्किल था संभलना ए दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया

हाले-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख्सत हुए, तब याद आया

 
दिन गुजारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया

बैठ कर साया-ए-गुल में 'नासिर'
हम बहुत रोये, वो जब याद आया

- नासिर

Thursday, October 29, 2009

आहिस्ता -आहिस्ता

सरकती जाए हैं रुख से नकाब आहिस्ता -आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफताब आहिस्ता -आहिस्ता

जवान होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा
हया यकलख्त आई और शबाब आहिस्ता -आहिस्ता

सब -ऐ -फ़ुर्कत का जागा हूँ परिस्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता -आहिस्ता

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फर्क है इतना
इधर तो जल्दी जल्दी है उधर आहिस्ता -आहिस्ता

सवाल-ऐ-वस्ल पर उनके उदू का खौफ है इतना
दबे होंठो से देते हैं जवाब आहिस्ता -आहिस्ता

वो बड़ी बेदर्दी से सर काटे 'अमीर' और मैं कहूं उनसे
हुजुर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता -आहिस्ता



-अमीर




मराठी रूपांतर

सरकत जात आहे चेहराहून मृगसाज सावकाश सावकाश
निघत येत राहत आहे गगनराज सावकाश सावकाश
 




तरुण होऊ लागले जेव्हा ते तर आमच्याशी करून घेतला पडदा
लाज अचानक आली आणि तारुण्य सावकाश सावकाश
 



विरहाच्या युगांपासून जागा आहे दूतांनो आता तरी निजू दया
कधी सवलती मध्ये करून घ्या हिशेब सावकाश सावकाश



माझ्या आणि तुझ्या प्रेमामध्ये बस फरक आहे इतकाच
इकडे तर घाई घाई आहे तिकडे सावकाश सावकाश
 



मिलनाच्या प्रश्नावर त्यांच्या प्रतिस्पर्ध्याचे सावट आहे इतकं
दबकत ओठांनी देत आहेत उत्तर सावकाश सावकाश



ते मोठ्या निर्दयतेने शिर सरसावून 'अमीर' आणि मी बोलू त्यांच्यांशी
यजमान सावकाश सावकाश श्रीमान सावकाश सावकाश
 



-अमीर

Thursday, September 10, 2009

गए दिनों का सुराग लेकर
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..

गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..

बस एक मोती सी छब दिखाकर ..
बस एक मोती सी छब दिखाकर..बस एक मीठी सी धुन सुनाकर
सितारा-ए-शाम बनके आया, बरअंगे ख्वाबे सहर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

न अब वो यादोंका चढ़ता दरया
न अब वो यादोंका चढ़ता दरया ..न फुर्सतोंकी उदास बरखा..
यूँही जरासी कसक है दिल में...यूँही जरासी कसक है दिल में
जो जख्म गहरा था भर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो हिज्र की रात का सितारा..
वो हिज्र की रात का सितारा, वो हमनफस हमसुखन हमारा
सदा रहे उसका नाम प्यारा..सदा..... रहे उसका नाम प्यारा .....
सुना है कल रात मर गया वो.......

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो तेरा शाइर वो तेरा नासिर
तेरी गली तक तो हमने देखा था फिर न जाने किधर गया वो....

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर.. किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

- नासिर

सुराग- चिन्हे
अजीब- विचित्र
मानूस- परिचित
बरअंगे ख्वाबे- स्वप्नील
सहर- प्रभात, पहाट, सकाळ
दरया- प्रवाह, नदी
बरखा- विरक्त, खिन्न, उदास
कसक- संभ्रम
हिज्र- विरह, वियोग
हमनफस- मित्र, सखा
हमसुखन- एकत्र बोलणारे, काव्य करणारे
बेनवा- कंगाल
शाइर- कवी
नासिर- सदोपदेशक, लीन, विनयशील



मराठी रुपांतर


गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो..

बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..
बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..बस एक गोड (सुरेल) धून ऐकवून
सायंतारा बनून आला, स्वप्नील पहाट बनून गेला तो....

ना आता तो आठवणींचा चढता दर्या
ना सवडीची उदास चर्या...
अशीच जराशी सल आहे हृदयात..अशीच जराशी सल आहे हृदयात
जो घाव खोल होता, भरून गेला तो..

तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा...
तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा, तो सखा काव्यमित्र आपला
सदा राहो त्याचं नाव प्रिय ... सदा ...राहो त्याचं नाव प्रिय
ऐकले आहे, काल रात्री मरून गेला तो...

तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो तुझा कवी तो तुझा चाहता
तुझ्या गल्ली पर्यंत तर आपण पाहिले होते परत काय माहित कुठे गेला तो...

गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो....

- नासिर

Monday, August 31, 2009

जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई
वो साथ कैसे कैसे बदनाम हुई
जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

हाय वो कैसा ख्वाब था, बरसो बीत गए..
हाय वो कैसा ख्वाब था, बरसो बीत गए
जबसे आंखे खोली, नींद हराम हुई..
जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

कौन पुकारेगा यूँ, तुझको देख नजअ
कौन पुकारेगा यूँ, तुझको देख नजअ
दिल की एक एक धड़कन तेरा नाम हुई....
जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

तेरी खातिर तेरा नाम न लेते थे
तेरी खातिर तेरा नाम न लेते थे...
लेकिन चुप की बात ,
बहोत बदनाम हुई..
जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

वो साथ कैसे कैसे बदनाम हुई
जब ऐ जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...



हजी- दुखी, पीडित,
आलाम- क्लेश, दुख
हराम- निषिद्ध
नजअ- शेवटचा श्वास




मराठी रुपांतर

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली
ती साथ कशी कशी अपमानित झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

हाय ते कसे स्वप्न होते, वर्षे लोटून गेली..
हाय ते कसे स्वप्न होते, वर्षे लोटून गेली..
जेव्हापासून डोळे उघडले, झोप निषिद्ध झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

कोण आळवेल असच, तुला बघ शेवटचा श्वास
कोण आळवेल असच, तुला बघ शेवटचा श्वास
हृदयाची एक एक स्पंदन तुझे नाव झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

तुझ्याखातर तुझे नाव नाही घेत होते..
तुझ्याखातर तुझे नाव नाही घेत होते..
पण गप्प ची गोष्ट ,
खुप अपमानित झाली....

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली


ती साथ कशी कशी अपमानित झाली..

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

Sunday, August 2, 2009


अभी न जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

अभी ना जाओ छोड़ कर ..के दिल अभी भरा नहीं..

अभी अभी तो आई हो
अभी अभी तो...
अभी अभी तो आई हो बहार बनके छाई हो
हवा जरा महक तो ले....
नजर जरा बहक तो ले
यह शाम ढल तो ले जरा

यह शाम ढल तो ले जरा
यह दिल संभल तो ले जरा
में थोडी देर जी तो लू नशे के घूंट पी तो लू
नशे के घूंट पी तो लू ......
अभी तो कुछ कहा नहीं
अभी तो कुछ सुना नहीं...

अभी न जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

सितारे झिलमिला उठे
सितारे झिलमिला उठे ...चराग ज़गमागा उठे
बस अब ना मुजको टोकना ....

बस अब ना मुजको टोकना
न बढ़के राह रोकना
अगर में रुक गयी अभी
तो जा न पायुंगी कभी
यही कहोगे तुम सदा
के दिल अभी नहीं भरा..
जो ख़त्म हो किसी जगह
यह ऐसा सिलसिला नहीं

अभी नहीं.. अभी नहीं...

नहीं ... नहीं... नहीं.. नहीं

अभी न जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

अधूरी आस..
अधूरी आस छोडके
अधूरी प्यास छोडके
जो रोज युही जाओगी
तो किस तरह निभाओगी
के जिंदगी की राह में
जवान दिलो की चाह में
कई मकाम आएँगे
जो हमको आजमाएँगे
बुरा ना मनो बात का
यह प्यार है गिला नहीं...

हां.. यही कहोगे तुम सदा
के दिल अभी भरा नहीं..

हां..दिल अभी भरा नहीं..

नहीं ... नहीं... नहीं.. नहीं