Showing posts with label नुसरत फ़तेह अली खान. Show all posts
Showing posts with label नुसरत फ़तेह अली खान. Show all posts

Tuesday, February 21, 2012

दिन में


दिन में कब सोचा करते थे सोंएँ गए हम रात कहाँ
अब ऐसे आवारा घूमें अपने वो हालात कहाँ


    कब थे तेज़-रवी पर नादान अब मंजिल पर तनहा हैं
    सोच रहे हैं इन हाथों से छूता था वो हाथ कहाँ 

 

 क्या तुम ने उनको देखा है क्या उनसे बातें की हैं      
तुमको क्या समझाएँ यारो खाई हम ने मात कहाँ      


बरसो बाद मिले हम उनसे दोनों थे शर्मिंदा से
दोनों ने चाहा भी लेकिन फिर आती वो बात कहाँ 


Sunday, July 25, 2010

तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो

तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे.. कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
होठों के पास आये हसीं क्या मजाल है..दिल का मुहमल्ला है कोई दिललगी नहीं
जख्म पे जख्म खा के ज़ी अपने लहू के घुट प़ी.. आह ना कर लबों को स़ी..इश्क है दिललगी नहीं

दिल लगाकर पता चलेगा तुम्हें ...आशकी की दिललगी नहीं होती..

 कुछ खेल नहीं है इश्क की लाग....पानी न समझ है आग है आग
खूँ रुलाएगी यह लगी दिलकी..खेल समझो न दिललगी दिलकी
यह इश्क नहीं आसाँ.. बस इतना समझ लीजिये..इक आग का दरया है..और डूब के जाना है

तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो..तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो

Saturday, July 17, 2010

मेरे दिल में तेरी यादों के साए
हवा जैसे खंडहर में सरसराए

हम ही ने सब के गम को अपना जाना
हम ही ने सब के हाथों जख्म पाए

दिल-ए-बेताब की उस्तअद तो देखो
ज़माने भर के इसमें गम समाए

किसीने प्यार से जब भी पुकारा
तो पलकों पर सितारे झिलमिलाए

शब्-ए-फ़ुर्कत हविक आहट पे मुझको
यही धोखा हुआ शायद वो आए

ख़ुशी दी है ज़माने भर को इमदाद
अगरचे उम्रभर आँसू बहाए


http://www.youtube.com/watch?v=TcDqUQzp0xs&feature

Thursday, February 11, 2010

जब तेरे दर्द में..
दिल दुखता था...
हम तेरे हक़ में दुआ करते थे
हम भी चुपचाप पिया करते थे

जब तेरे दर्द में..
जिया करते थे
जब तेरे दर्द में..
जिया करते थे





Monday, January 4, 2010

कैसर

मेरी  आँखों  को  आँखों  का  किनारा  कौन  दे  गा
समंदर  को  समंदर  में  सहारा  कौन  दे  गा

मेरे  चेहरे  को  चेहरा  कब  इनायत  कर  रहे  हो
तुम्हें  मेरे  सिवा  चेहरा  तुम्हारा  कौन  दे  गा

मुहब्बत  नीला  मौसम  बन  के  आ  जाएगी  इक  दिन
गुलाबी  तितलियों  को  फिर  सहारा  कौन  दे  गा

 
मेरी  आवाज़  में  आवाज़  किस  क़ी  बोलती  है
मेरे  गीतों  को  गीतों  का  किनारा  कौन  दे  गा 




बदन  में  एक  सहरा  जल  रहा  है  बुझ  रहा  है
मेरे  दरयाओं  को  'कैसर'  इशारा  कौन  दे  गा


 - कैसर

Tuesday, December 29, 2009

हिजाब को..

हिजाब  को..
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था.... 
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था
हाँ  मुझी  को...
मुझी  को...
हाँ  मुझी  को  ख़राब  होना  था
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

खेली  बचपन  में  आँख  मचोली  बहोत  
खेली  बचपन  में  आँख  मचोली  बहोत....
खेली  बचपन  में  आँख  मचोली  बहोत
आया  शबाब...
आया  शबाब  तो  हिसाब  होना  था 
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

साथ  रहते  हैं  रात  दिन  की  तरह
साथ  रहते  हैं  रात  दिन  की  तरह
साथ  रहते  हैं  रात  दिन  की  तरह.....
तुम  हो  माहताब...
तुम  हो  माहताब  मुझे  आफताब  होना  था 
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

मेरी  आँखों  का  कुछ  क़ुसूर  नहीं
मेरी  आँखों  का  कुछ  क़ुसूर  नहीं
मेरी  आँखों  का  कुछ  क़ुसूर  नहीं
हुस्न  को...
हुस्न  को  लाज़वाब  होना  था 
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

था  मुक़द्दर  में  हमारा  मिलना 
था..था  मुक़द्दर  में  हमारा  मिलना...
था  मुक़द्दर  में  हमारा  मिलना..
वगरना  हममें...
वगरना  हममें  कहाँ  कामयाब  होना  था
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था ,
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

हिजाब  को  बेनकाब  होना  था
हाँ  मुझी  को  ख़राब  होना  था
हिजाब  को  बेनकाब  होना  था , हिजाब  को ...

Wednesday, November 25, 2009

खुसरौ


जिहाल  -ए  मिस्कीं  मकुन  तगफुल,
दुराये नैना बनाये बतियाँ
की  ताब  -ए  हिज्राँ  नदारम  ए  जाँ ,
न ले हो काहे लगाये छतियाँ

चो  शमा  सोज़ान  चो  ज़र्रा  हैरान,
हमेशा  गिरियाँ  बे  इश्क  आन  मह
न नींद नैना न अंग चैना
न आप ही आवें न भेजें पतियाँ

 
यकायक  अज  दिल  बसद  फरेबम 
 बबुर्द  चशमश  -ए  करार्र  तस्कीं 


किसे पड़ी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियाँ

शबान  -ए  हिज्राँ  दराज़  चुन  ज़ुल्फ़
व  रोज़  -ए  वसलत  चो  उम्र  कोताह
सखी पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ

बहक्क  -ए   रोज़  -ए  विसाल  -ए  दिलबर
की  दाद  मरा  ग़रीब  खुसरौ
सपत मन के वराए राखूँ
जो जाए पाऊँ पिया के खतियाँ 


Tuesday, October 27, 2009

आदमी आदमी से मिलता हैं

आदमी आदमी से मिलता हैं
दिल मगर कम किसीसे मिलता हैं..

भूल जाता हूँ मैं सितम उसके
वो कुछ इस सादगी से मिलता हैं..

आज क्या बात है के फुलोंका
रंग तेरी हँसी से मिलता हैं..

मिलके भी जो कभी नहीं मिलता
टूट कर दिल उसीसे मिलता हैं..

रूह को भी मजा मोहबत का
दिल की हमसाएगी से मिलता हैं..

सिलसिला फितन-ए-क़यामत का
तेरी खुश-क़ीमती से मिलता हैं..

कारोबारें जहाँ सँवरते हैं..
होश जब बेखुदी से मिलता हैं..

Tuesday, October 20, 2009

ना सवाल बनके मिला करो..




ना सवाल बनके मिला करो.. ना जवाब बनके मिला करो..
मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है..
मुझे ख्वाब बनके मिला करो..

ना सवाल बनके मिला करो.. ना जवाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

अरे शाम को मेरे दोस्तों ना अजाब बनके मिला करो..
अरे शाम को मेरे दोस्तों ना अजाब बनके मिला करो..
मुझे मैकदे में मिलो अगर तो शराब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

मुझे अच्छे लोग बहोत मिलें, मैं तो उनके क़र्ज से मर गया
मुझे अच्छे लोग बहोत मिलें, मैं तो उनके क़र्ज से मर गया
अरे हो सके तो कभी कभी तो ख़राब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

अभी तो सोचना हैं तो सोच लो, अभी छोड़ना हैं तो छोड़ दो..
अभी तो सोचना हैं तो सोच लो, अभी छोड़ना हैं तो छोड़ दो..
नये मौसमों में मिलो मुझे तो गुलाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

ना तो इस तरह से मिला करो, ना तो उस तरह से मिला करो..
ना तो इस तरह से मिला करो, ना तो उस तरह से मिला करो..
हाँ हुजूर बनके मिला करो..हाँ जनाब बनके मिला करो
ना सवाल बनके मिला करो..
ना जवाब बनके मिला करो..

मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. 
मुझे ख्वाब बनके मिला करो..

ना सवाल बनके मिला करो..ना जवाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..