तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे.. कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
होठों के पास आये हसीं क्या मजाल है..दिल का मुहमल्ला है कोई दिललगी नहीं जख्म पे जख्म खा के ज़ी अपने लहू के घुट प़ी.. आह ना कर लबों को स़ी..इश्क है दिललगी नहीं
दिल लगाकर पता चलेगा तुम्हें ...आशकी की दिललगी नहीं होती..
कुछ खेल नहीं है इश्क की लाग....पानी न समझ है आग है आग
खूँ रुलाएगी यह लगी दिलकी..खेल समझो न दिललगी दिलकी यह इश्क नहीं आसाँ.. बस इतना समझ लीजिये..इक आग का दरया है..और डूब के जाना है
तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो..तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
Saturday, July 17, 2010
मेरे दिल में तेरी यादों के साए
हवा जैसे खंडहर में सरसराए
हम ही ने सब के गम को अपना जाना
हम ही ने सब के हाथों जख्म पाए
दिल-ए-बेताब की उस्तअद तो देखो
ज़माने भर के इसमें गम समाए
किसीने प्यार से जब भी पुकारा
तो पलकों पर सितारे झिलमिलाए
शब्-ए-फ़ुर्कत हविक आहट पे मुझको
यही धोखा हुआ शायद वो आए
ख़ुशी दी है ज़माने भर को इमदाद
अगरचे उम्रभर आँसू बहाए
हिजाब को.. हिजाब को बेनकाब होना था.... हिजाब को बेनकाब होना था हाँ मुझी को... मुझी को... हाँ मुझी को ख़राब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
खेली बचपन में आँख मचोली बहोत खेली बचपन में आँख मचोली बहोत.... खेली बचपन में आँख मचोली बहोत आया शबाब... आया शबाब तो हिसाब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
साथ रहते हैं रात दिन की तरह साथ रहते हैं रात दिन की तरह साथ रहते हैं रात दिन की तरह..... तुम हो माहताब... तुम हो माहताब मुझे आफताब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
मेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं मेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं मेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं हुस्न को... हुस्न को लाज़वाब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
था मुक़द्दर में हमारा मिलना था..था मुक़द्दर में हमारा मिलना... था मुक़द्दर में हमारा मिलना.. वगरना हममें... वगरना हममें कहाँ कामयाब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
हिजाब को बेनकाब होना था हाँ मुझी को ख़राब होना था हिजाब को बेनकाब होना था , हिजाब को ...
जिहाल -ए मिस्कीं मकुन तगफुल, दुराये नैना बनाये बतियाँ की ताब -ए हिज्राँ नदारम ए जाँ , न ले हो काहे लगाये छतियाँ
चो शमा सोज़ान चो ज़र्रा हैरान, हमेशा गिरियाँ बे इश्क आन मह न नींद नैना न अंग चैना न आप ही आवें न भेजें पतियाँ यकायक अज दिल बसद फरेबम बबुर्द चशमश -ए करार्र तस्कीं
किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ
शबान -ए हिज्राँ दराज़ चुन ज़ुल्फ़ व रोज़ -ए वसलत चो उम्र कोताह सखी पिया को जो मैं न देखूं तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ बहक्क -ए रोज़ -ए विसाल -ए दिलबर की दाद मरा ग़रीब खुसरौ सपत मन के वराए राखूँ जो जाए पाऊँ पिया के खतियाँ