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Tuesday, January 3, 2012

वोह तो न मिल सकें..

वोह तो न मिल सकें हमें रुसवाइयाँ मिली
लेकिन हमारे इश्क को रानाइयां मिली


आँखों में उनकी डूब के देखा है बारहां
जिनकी थी आरजू न वो गहराइयाँ मिली


आइना रख के सामने आवाज दी उसे
उसके बगर जब मुझे तन्हाईयाँ मिली


आए थे वो नजर मुझे फूलों के आसपास
देखा करीब जाके तो परछाइयाँ मिली


पूछा जो दिल की मैंने तबाही का माजरा
हसकर जवाब दे मुझे अंगड़ाइयां मिली


नासिर दिल-ऐ-तबाह न उनको दिखा सदा
मिलने को बारहां उसे तन्हाईयाँ मिली


                            - नासिर

Saturday, November 27, 2010

जब से तु ने मुझे दीवाना बना रखा है..

आप गैरोंकी बात करते है..
हमने अपने भी आजमाए है
लोग काँटों से बच के चलते है
हमने फूलों से जख्म खाए है

किस का क्या जो कदमों पर जब इन्हें बंदगी रख दी
हमारी चीज़ थी हमने जानी वहा रख दी
जो दिल माँगा तो वो बोले के ठहरो याद करने दो 
जरा सी चीज़ थी हमने खुदा जाने कहा रख दी

संग हर शख्श ने उठाया रखा है
जब से तु ने मुझे दीवाना बना रखा है

निगाह नाज़ से पूछेंगे किस दिन यह जहीन ...तू ने क्या क्या न बनाया तो ये क्या क्या न बना

उसके दिल पर भी कड़ी इश्क में गुजरी होगी
नाम जिसने भी मुहब्बत का सजा रखा है

आ पिया मोरे नैन में...मैं पलक ढाँक तोहे लूँ... ना मैं देखूं और को और न तोहे देखन दूँ

पत्थरों.. आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो
दुनिया बड़ी बावरी पत्थर पूजने जाये..घरकी चक्की कोई न पूजे जिसका पिसा खाए
मैंने तुमको भी कभी अपना खुदा रखा है

अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाई है
तुने क्या मुझके मुहब्बत में बना रखा है

नदी किनारे धुँआ उठे मैं जानू कुछ होय..जिस कारन मैं जोगन बनी कही वो ही न जलता होय..
पि जा अय्याम की कल्बी को भी हसके नासीर
हम को सहने में भी कुदरत ने मजा रखा है
 
जब से तु ने मुझे दीवाना बना रखा है............

Friday, March 5, 2010

तेरे आने का धोखा सा रहा है
दिया सा रात भर जलता रहा है

अजब है रात से आँखों का आलम
ये दरिया रात भर चढ़ता रहा है

सुना है रात भर बरसा है बादल
मगर वो शहर जो प्यासा रहा है

वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है

किसे ढून्दोगे इन गलियों में 'नासिर'
चलो अब घर चले दिन जा रहा है

- नासिर

Sunday, December 13, 2009

नासिर

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी, अब याद आया

आज मुश्किल था संभलना ए दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया

हाले-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख्सत हुए, तब याद आया

 
दिन गुजारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया

बैठ कर साया-ए-गुल में 'नासिर'
हम बहुत रोये, वो जब याद आया

- नासिर

Thursday, September 10, 2009

गए दिनों का सुराग लेकर
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..

गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..

बस एक मोती सी छब दिखाकर ..
बस एक मोती सी छब दिखाकर..बस एक मीठी सी धुन सुनाकर
सितारा-ए-शाम बनके आया, बरअंगे ख्वाबे सहर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

न अब वो यादोंका चढ़ता दरया
न अब वो यादोंका चढ़ता दरया ..न फुर्सतोंकी उदास बरखा..
यूँही जरासी कसक है दिल में...यूँही जरासी कसक है दिल में
जो जख्म गहरा था भर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो हिज्र की रात का सितारा..
वो हिज्र की रात का सितारा, वो हमनफस हमसुखन हमारा
सदा रहे उसका नाम प्यारा..सदा..... रहे उसका नाम प्यारा .....
सुना है कल रात मर गया वो.......

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो तेरा शाइर वो तेरा नासिर
तेरी गली तक तो हमने देखा था फिर न जाने किधर गया वो....

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर.. किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

नासिर

सुराग- चिन्हे
अजीब- विचित्र
मानूस- परिचित
बरअंगे ख्वाबे- स्वप्नील
सहर- प्रभात, पहाट, सकाळ
दरया- प्रवाह, नदी
बरखा- विरक्त, खिन्न, उदास
कसक- संभ्रम
हिज्र- विरह, वियोग
हमनफस- मित्र, सखा
हमसुखन- एकत्र बोलणारे, काव्य करणारे
बेनवा- कंगाल
शाइर- कवी
नासिर- सदोपदेशक, लीन, विनयशील



मराठी रुपांतर


गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो..

बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..
बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..बस एक गोड (सुरेल) धून ऐकवून
सायंतारा बनून आला, स्वप्नील पहाट बनून गेला तो....

ना आता तो आठवणींचा चढता दर्या
ना सवडीची उदास चर्या...
अशीच जराशी सल आहे हृदयात..अशीच जराशी सल आहे हृदयात
जो घाव खोल होता, भरून गेला तो..

तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा...
तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा, तो सखा काव्यमित्र आपला
सदा राहो त्याचं नाव प्रिय ... सदा ...राहो त्याचं नाव प्रिय
ऐकले आहे, काल रात्री मरून गेला तो...

तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो तुझा कवी तो तुझा चाहता
तुझ्या गल्ली पर्यंत तर आपण पाहिले होते परत काय माहित कुठे गेला तो...

गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो....

नासिर