गुलों में रंग भरे, बादे-नौबहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
क़फ़स उदास है यारो, सबा से कुछ तो कहो
कहीं तो बहरे-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
कभी तो सुब्ह तेरे कुंजे-लब से हो आग़ाज़
कभी तो शब सरे-काकुल से मुश्के-बार चले
बड़ा है दर्द का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही
तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़मगुसार चले
जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शबे-हिज्राँ
हमारे अश्क तेरी आक़बत सँवार चले
हुज़ूरे-ए-यार हुई दफ़्तरे-जुनूँ की तलब
गिरह में लेके गरेबाँ का तार तार चले
मक़ाम 'फैज़' कोई राह में जचा ही नहीं
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले
- फैज़
Thursday, January 6, 2011
फैसला तुमको भूल जाने का
एक नया ख्वाब है दीवाने का
दिल कली का लरज लरज उठा
जिक्र था फिर बहार आने का
हौसला कम किसी में होता है
जीत कर खुद ही हार जाने का
जिंदगी कट गई मनाते हुए
अब इरादा है रूठ जाने का
आप शहजाद की ना फिक्र करें
वो तो आदि है जख्म खाने का
- शहजाद
Monday, December 6, 2010
दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुःख सहते है
हम ने सुना था इस बस्ती में दिलवाले भी रहते है
एक हमे आवारा कहना कोई बड़ा इल्जाम नहीं
दुनिया वाले दिलवालों को और बहोत कुछ कहते है
बीत गया सावन का महिना मौसम ने नजरे बदले
लेकिन इन प्यासी आँखों से अब तक आंसू बहते है
जिन की खातिर शहर भी छोड़ा, जिन के लिए बदनाम हुए
आज वो भी हम से बेगाने बेगाने से रहते है
वो जो अभी इस राहगुजर से चाक ए गिरेबाँ गुजरा था
उस आवारा दीवाने को जालिब जालिब कहते है
-जालिब
Friday, June 18, 2010
मैं नज़र से पी रहा हूँ, ये समां बदल न जाए
न उठाओ तुम निगाहें, कहीं रात ढल न जाए
अभी रात कुछ है बाकि, न उठा नकाब साकी
तेरा रिंद गिरते गिरते, कहीं फिर संभल न जाए
मेरे जिंदगी के मालिक, मेरे दिल पे हाथ रख दे
तेरे आने के ख़ुशी में, मेरा दम निकल न जाए
मेरे अश्क भी है इस में, जो शराब बन रही है मेरा जाम छूने वाले, तेरा हाथ जल न जाए
मैं बना करू नशेमन किसी शाख-ए-गुल्सिता पे कहीं साथ आशियाँ के, ये चमन भीजल न जाए
Friday, May 7, 2010
क्या टूटा है.... अन्दर अन्दर, क्यों चेहरा कुम्हलाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर, क्यों चेहरा कुम्हलाया है
तनहा तनहा रोने वालो, कौन तुम्हे याद आया है........... क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
चुपके चुपके सुलगे रहे थे, याद में उनकी दीवाने..
एकतारे में टूट के यारो...... एकतारे में टूट के यारो....क्या उनके समझाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
रंगबरंगी इस महफ़िल में... रंगबरंगी इस महफ़िल में, तुम क्यों इतने चुपचुप हो भूल भी जाओ पागल लोगो.... भूल भी जाओ पागल लोगो.... क्या खोया क्या पाया है..... क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
शेर कहा है खून है दिल का .... शेर कहा है खून है दिल का, जो लफ्जों में बिखरा है शेर कहा है खून है दिल का......जो लफ्जों में बिखरा है..
दिल के जख्म दिखा कर हमने दिल के जख्म दिखा कर हमने..महफ़िल को गरमाया है.............. क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो... वो इतना बेदर्द नहीं अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो, वो इतना बेदर्द नहीं
अपनी चाहत को भी परखो.. अपनी चाहत को भी परखो, गर इम्जाम लगाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
तेरी हर चाप से जलते हैं ख्यालों में चिराग
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
तुझको छू लूं तो फिर ऐ जाँ ए तमन्ना मुझको
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबु आये
तू बहारों का है उनवान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर मेरी जाँ तुझे चाहूँगा
जिंदगी में तो सभी प्यार किया करते है
Sunday, February 28, 2010
प्यार भरे दो शर्मीले नैन... जिनसे मिला मेरे दिल को चैन
कोई जाने ना... क्यूँ मुझसे शरमाए... कैसे मुझे तडपाए...
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
दिल ये कहे गीत मैं तेरे गाऊ.. तू ही सुने और मैं गाता जाऊ..
तू जो रहे साथ मेरे ..दुनिया को ठुकराऊ.. तेरा दिल बहलाऊ..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
रूप तेरा कलियों को शरमाए.. कैसे कोई अपने दिल को बचाए..
पास है तू ..फिर भी जलूँ कौन तुझे समझाए..सावन बीता जाए..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
डर है मुझे तुझसे बिछड़ ना जाऊ..खो के तुझे मिलने की राह न पाऊ..
ऐसा ना हो ..जब भी तेरा ...नाम लबों पर लाऊ.. मैं आंसू बन जाऊ..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...जिनसे मिला मेरे दिल को चैन
कोई जाने ना... क्यूँ मुझसे शरमाए... कैसे मुझे तडपाए...
यूँ... जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में....
इक रोशनी अंधेरों में बिखरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में....
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूँ, कितनी अजब थी सूरते हालात क्या कहूँ
वो कहर वो गज़ब वो जफा मुझको याद है,
वो उसकी बेरुखी की अदा मुझको याद है,
मिटता नहीं है जहेन से यूँ छा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
पहले वो मुझको देखकर बरहम सी हो गई,
पहले..वो मुझको देखकर बरहम सी हो गई, फिर अपने ही नसीब खयालों में खो गई
बेचारगी पे मेरे उसे रहम आ गया,
शायद मेरे तड़पने का अंदाज भा गया,
सांसों से भी करीब मेरे आ गया कोई...
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
अब उस गिले तबाह की हालत ना पूछिये,
अब उस गिले तबाह की हालत ना पूछिये, बेनाम आरजू की लजत ना पूछिये
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया,
इक हादसा था प्यार का उनवान बन गया,
मंजिल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई...
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
इक रोशनी अंधेरों में बिखरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई