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Monday, May 28, 2012

रोया करेंगे..

रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह
अटका कहीं जो आप का दिल भी मेरी तरह

ना ताब हिज्र में है ना आराम वस्ल में
कमबख्त दिल को चैन नहीं है किसी तरह

गर चुप रहें तो गमे हिज्राँ से छूट जाएँ
कहते तो हैं भले की वो लेकिन बुरी तरह

न जाए वहां बने है न बिन जाए चैन है
क्या कीजिए हमें तो है मुश्किल सभी तरह

हूँ जाँ बलब बुताने सितमगर के हाथ से
क्या सब जहाँ में जीते हैं मोमिन इसी तरह 

                     - मोमिन खान

Monday, October 4, 2010

वो  जो  हम  में  तुम  में  करार  था , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो 
वही  यानी  वादा  निबाह  का , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो 

वो  जो  लुत्फ़  मुझ  पे  थे  पेश्तर , वो  करम  के  हाथ  मेरे  हाल  पर
मुझे  सब  हैं  याद  ज़रा  ज़रा , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

वो  नए  गिले  वो  शिकायतें , वो  मज़े  मज़े  की  हिकायतें
वो  हर  एक  बात  पे  रूठना , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो


कोई  बात  ऎसी  अगर  हुई  जो  तुम्हारे  जी  को  बुरी  लगी
तो  बयां  से  पहले  ही  भूलना  तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो


सुनो  ज़िक्र  है  कई  साल  का , कोई  वादा  मुझ  से  था  आप  का
वो  निबाहने  का  तो  ज़िक्र  क्या , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

कभी  हममें  तुम  में  भी  चाह  थी , कभी  हम  से  तुम  से  भी  राह  थी
कभी  हम  भी  तुम  भी  थे  आशना , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

हुए  इत्तेफाक  से  गर  बहम , वो  वफ़ा  जताने  को  दम -बा -दम
गिला -ए-मलामत -ए -अर्क़बा , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

कभी  बैठे  सब  हैं  जो  रू -ब-रू  तो  इशारतों  ही  से  गुफ्तगू
वो  बयान  शौक़  का  बरमला  तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

वो  बिगड़ना  वस्ल  की  रात  का , वो  न  मानना  किसी  बात  का
वो  नहीएँ  नहीं  की  हर  आन  अदा , तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो

जिसे  आप  गिनते  थे  आशना  जिसे  आप  कहते  थे  बावफ़ा
मैं  वही  हूँ  "मोमिन "-ए -मुब्तला  तुम्हें  याद  हो  के  न  याद  हो