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Saturday, January 15, 2011

वो अजीब शख्स था....

वो  अजीब  शख्स  था  भीड़  मैं  जो  नज़र  मैं  ऐसे  उतर   गया


जिसे  देख  कर  मेरे  होंट  पर  मेरा  अपना  शेर  ठहर  गया


कई  शेर  उस  की  निगाह  से  मेरे  रुख  पे  आ  के  ग़ज़ल  बने


वो  निराला  तर्ज़ -ए -पयाम था  जो  सुखन  की  हद  से  गुज़र  गया

वो  हर  एक  लफ्ज़  मैं  चाँद  था  वो  हर  एक  हर्फ़  मैं  नूर  था 


वो  चमकते  मिसरों   का  अक्स  था  जो  ग़ज़ल  में  खुद  ही  संवर  गया


जो  लिखूं  तो  नोक -ए -कलम   पे  वो  , जो  पढ़ूं  तो  नोक -ए -जुबां  पे  वो

मेरा  जौक  भी  मेरा  शौक   भी  मेरे  साथ  साथ  निखर  गया





Sunday, September 20, 2009

अभी से कैसे कहूँ तुमको बेवफा साहब...
अभी से कैसे कहूँ तुमको बेवफा साहब...

अभी तो अपने सफ़र की है इब्तदा साहब..

न जाने कितने लकब दे रहा है दिल तुमको..
न जाने कितने लकब दे रहा है दिल तुमको..
हुजुर जाने वफ़ा और हम नवाँ साहब..
हुजुर जाने वफ़ा और हम नवाँ साहब..

तुम्हारे याद में तारे शुमार करती हूँ
तुम्हारे याद में तारे शुमार करती हूँ
न जाने ख़त्म कहाँ हो ये सिलसिला साहब..
न जाने ख़त्म कहाँ हो ये सिलसिला साहब..

तुम्हारा चेहरा मेरे अख्स से उबरता है
तुम्हारा चेहरा मेरे अख्स से उबरता है
न जाने कौन बदलता है आयना साहब..

अभी तो अपने सफ़र की है इब्तदा साहब..
अभी से कैसे कहूँ तुमको बेवफा साहब..

- इंदिरा वर्मा

Sung By - Rekha Bhardwaj
Music By - Sudeep Banerjee