Thursday, September 10, 2009

गए दिनों का सुराग लेकर
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..
अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..

गए दिनों का सुराग लेकर, किधर से आया किधर गया वो..

बस एक मोती सी छब दिखाकर ..
बस एक मोती सी छब दिखाकर..बस एक मीठी सी धुन सुनाकर
सितारा-ए-शाम बनके आया, बरअंगे ख्वाबे सहर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

न अब वो यादोंका चढ़ता दरया
न अब वो यादोंका चढ़ता दरया ..न फुर्सतोंकी उदास बरखा..
यूँही जरासी कसक है दिल में...यूँही जरासी कसक है दिल में
जो जख्म गहरा था भर गया वो..

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो हिज्र की रात का सितारा..
वो हिज्र की रात का सितारा, वो हमनफस हमसुखन हमारा
सदा रहे उसका नाम प्यारा..सदा..... रहे उसका नाम प्यारा .....
सुना है कल रात मर गया वो.......

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो रात का बेनवा मुसाफिर..
वो तेरा शाइर वो तेरा नासिर
तेरी गली तक तो हमने देखा था फिर न जाने किधर गया वो....

अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर.. किधर से आया किधर गया वो..
गए दिनों का सुराग लेकर..

नासिर

सुराग- चिन्हे
अजीब- विचित्र
मानूस- परिचित
बरअंगे ख्वाबे- स्वप्नील
सहर- प्रभात, पहाट, सकाळ
दरया- प्रवाह, नदी
बरखा- विरक्त, खिन्न, उदास
कसक- संभ्रम
हिज्र- विरह, वियोग
हमनफस- मित्र, सखा
हमसुखन- एकत्र बोलणारे, काव्य करणारे
बेनवा- कंगाल
शाइर- कवी
नासिर- सदोपदेशक, लीन, विनयशील



मराठी रुपांतर


गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो..

बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..
बस एक मौतिक (मोतीसारखी) छबी दाखवून..बस एक गोड (सुरेल) धून ऐकवून
सायंतारा बनून आला, स्वप्नील पहाट बनून गेला तो....

ना आता तो आठवणींचा चढता दर्या
ना सवडीची उदास चर्या...
अशीच जराशी सल आहे हृदयात..अशीच जराशी सल आहे हृदयात
जो घाव खोल होता, भरून गेला तो..

तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा...
तो वियोगाच्या रात्रीचा तारा, तो सखा काव्यमित्र आपला
सदा राहो त्याचं नाव प्रिय ... सदा ...राहो त्याचं नाव प्रिय
ऐकले आहे, काल रात्री मरून गेला तो...

तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो रात्रीचा कंगाल मुसाफिर...
तो तुझा कवी तो तुझा चाहता
तुझ्या गल्ली पर्यंत तर आपण पाहिले होते परत काय माहित कुठे गेला तो...

गेल्या दिवसांच्या खुणा घेऊन, कुठून आला कुठे गेला तो..
विचित्र परिचित पण अनोळखी होता, मला तर हैराण करून गेला तो....

नासिर

Monday, August 31, 2009

जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई
वो साथ कैसे कैसे बदनाम हुई
जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

हाय वो कैसा ख्वाब था, बरसो बीत गए..
हाय वो कैसा ख्वाब था, बरसो बीत गए
जबसे आंखे खोली, नींद हराम हुई..
जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

कौन पुकारेगा यूँ, तुझको देख नजअ
कौन पुकारेगा यूँ, तुझको देख नजअ
दिल की एक एक धड़कन तेरा नाम हुई....
जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

तेरी खातिर तेरा नाम लेते थे
तेरी खातिर तेरा नाम लेते थे...
लेकिन चुप की बात ,
बहोत बदनाम हुई..
जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...

वो साथ कैसे कैसे बदनाम हुई
जब जाने हजी वक़्त पे आलाम हुई...



हजी- दुखी, पीडित,
आलाम- क्लेश, दुख
हराम- निषिद्ध
नजअ- शेवटचा श्वास




मराठी रुपांतर

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली
ती साथ कशी कशी अपमानित झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

हाय ते कसे स्वप्न होते, वर्षे लोटून गेली..
हाय ते कसे स्वप्न होते, वर्षे लोटून गेली..
जेव्हापासून डोळे उघडले, झोप निषिद्ध झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

कोण आळवेल असच, तुला बघ शेवटचा श्वास
कोण आळवेल असच, तुला बघ शेवटचा श्वास
हृदयाची एक एक स्पंदन तुझे नाव झाली..
जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

तुझ्याखातर तुझे नाव नाही घेत होते..
तुझ्याखातर तुझे नाव नाही घेत होते..
पण गप्प ची गोष्ट ,
खुप अपमानित झाली....

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली


ती साथ कशी कशी अपमानित झाली..

जेव्हा ए व्याकुळ हृदया अगदी वेळेवर पीडा झाली

Wednesday, August 12, 2009

गालिब

खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..
खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..

इतने ख्वाब आँखों आँखों
किस किस की ताबीर करू..
खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..

जिसके साए में बैठू तो
सारे गम बेगाने हो..

जिसके साए में बैठू तो
सारे गम बेगाने हो..
बेगाने हो..
पहले हर दीवार गिराऊ
फिर वो घर तामीर करू...
इतने ख्वाब आँखों आँखों
किस किस की ताबीर करू..

खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..

तुमने कुछ पूछा था मुज़से
और में अब तक सोचता हूँ ...

तुमने कुछ पूछा था मुज़से
और में अब तक सोचता हूँ ...
सोचता हूँ ...
कितने जख्म छुपाकर रखूं....
कितने गम तहरीर करू...
इतने ख्वाब आँखों आँखों
किस किस की ताबीर करू..

खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..

हर वो बयां की दुःख नगरी में
आया हूँ तो चाहता हूँ

हर वो बयां की दुःख नगरी में
आया हूँ तो चाहता हूँ
चाहता हूँ........
पहले श उर ए गालिब लाऊं
फिर तक़दीर ए निर करू...
इतने ख्वाब आँखों आँखों
किस किस की ताबीर करू..

खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..
इतने ख्वाब आँखों आँखों
किस किस की ताबीर करू..

खुशबु का कोई झोंका हो तो
सांसो से जंजीर करू..

-गालिब



गालिब


सुगंधाची कोण झुळूक असेल तर, श्वासांनी साखळी करू..
इतके स्वप्न डोळ्यां-डोळ्यांत, कोण-कोणाची पूर्ती करू..


ज्याच्या
छायेत मी बसू, तर सगळी दु: परकी होत..
पहिले प्रत्येक भिंत पाडत, परत ते घर चिरेबंदी करू..


तू
काही प्रश्नावले होते मला आणि मी आता पर्यंत चिंतीतोय...
किती जखमा लपवून ठेऊ...किती दु:ख अक्षरी करू..

दर
त्या कथेच्या शोकनगरीत आलो आहे तर इच्छितोय.
इच्छितोय
...
प्रथम
संवेदना गालिब आणू, मग एकांतात डोळे निखळती करू..


सुगंधाची
कोण झुळूक असेल
तर
श्वासांनी साखळी करू..


-गालिब

Sunday, August 2, 2009


अभी जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

अभी ना जाओ छोड़ कर ..के दिल अभी भरा नहीं..

अभी अभी तो आई हो
अभी अभी तो...
अभी अभी तो आई हो बहार बनके छाई हो
हवा जरा महक तो ले....
नजर जरा बहक तो ले
यह शाम ढल तो ले जरा

यह शाम ढल तो ले जरा
यह दिल संभल तो ले जरा
में थोडी देर जी तो लू नशे के घूंट पी तो लू
नशे के घूंट पी तो लू ......
अभी तो कुछ कहा नहीं
अभी तो कुछ सुना नहीं...

अभी जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

सितारे झिलमिला उठे
सितारे झिलमिला उठे ...चराग ज़गमागा उठे
बस अब ना मुजको टोकना ....

बस अब ना मुजको टोकना
बढ़के राह रोकना
अगर में रुक गयी अभी
तो जा पायुंगी कभी
यही कहोगे तुम सदा
के दिल अभी नहीं भरा..
जो ख़त्म हो किसी जगह
यह ऐसा सिलसिला नहीं

अभी नहीं.. अभी नहीं...

नहीं ... नहीं... नहीं.. नहीं

अभी जाओ छोड़ कर
के दिल अभी भरा नहीं..

अधूरी आस..
अधूरी आस छोडके
अधूरी प्यास छोडके
जो रोज युही जाओगी
तो किस तरह निभाओगी
के जिंदगी की राह में
जवान दिलो की चाह में
कई मकाम आएँगे
जो हमको आजमाएँगे
बुरा ना मनो बात का
यह प्यार है गिला नहीं...

हां.. यही कहोगे तुम सदा
के दिल अभी भरा नहीं..

हां..दिल अभी भरा नहीं..

नहीं ... नहीं... नहीं.. नहीं

Saturday, July 25, 2009

आपकी याद आती रही रातभर
आपकी याद आती रही रातभर
चश्मेनम मुस्कुराती रही रातभर
आपकी याद आती रही... ll दृ ll

रातभर दर्द की शम्मा जलती रहे
रातभर दर्द की शम्मा जलती रहे..

गम की लव थरथराती रहे रातभर
गम की लव थरथराती रहे रातभर..
आपकी याद आती रही... ll1ll

बासुरी की सुरीली सुहानी सदां
बासुरी की सुरीली सुहानी सदां..

याद बन बन के आती रही रातभर
याद बन बन के आती रही रातभर
चश्मेनम मुस्कुराती रही... ll2ll

याद के चाँद दिल में उतरते रहे
याद के चाँद...
याद के चाँद दिल में उतरते रहे

चांदनी जगमगाती रही रातभर
चांदनी जगमगाती रही रातभर..
आपकी याद आती रही... ll3ll

कोई दीवाना गलियोंमे फिरता रहा
कोई दीवाना...
कोई दीवाना गलियोंमे फिरता रहा
कोई आवाज आती रही रातभर
कोई आवाज आती रही रातभर
चश्मेनम मुस्कुराती रही रातभर
आपकी याद आती रही... ll4ll


Tuesday, July 21, 2009

आज जाने की जिद ना करो
आज जाने की जिद ना करो...

युही पहलू में बैठे रहो
युही पहलू में बैठे रहो..
आज जाने की जिद ना करो

हाय मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बाते किया ना करो....
आज जाने की जिद ना करो
आज जाने की जिद ना करो..

हाय मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बाते किया ना करो....
आज जाने की जिद ना करो

तुम ही सोचो जरा क्यों न रोके तुम्हे ..
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम...
तुमके अपनी कसम
जान ए जा..
बात इतनी मेरी मान लो..
आज जाने की जिद ना करो
आज जाने की जिद ना करो...

युही पहलू में बैठे रहो
युही पहलू में बैठे रहो..
आज जाने की जिद ना करो

हाय मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बाते किया ना करो....
आज जाने की जिद ना करो..

वक़्त की कैद में जिंदगी है मगर
वक़्त की कैद में जिंदगी है मगर
चंद घडिया यही है जो आजाद है..
चंद घडिया यही है जो आजाद है....
इनको खो कर मेरे..
जान ए जा...
उम्रभर ना तरसते रहो..
आज जाने की जिद ना करो...

हाय मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बाते किया ना करो....
आज जाने की जिद ना करो

कितना मासूम रंगीन है ये समां
हुस्न और इश्क की आज मयराज है..
हुस्न और इश्क की आज मयराज है..
कल की किसको खबर
जान ए जा...
रोक लो आज की रात को
आज जाने की जिद ना करो

युही पहलू में बैठे रहो
युही पहलू में बैठे रहो..
आज जाने की जिद ना करो

हाय मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बाते किया ना करो....
आज जाने की जिद ना करो..

Friday, July 10, 2009

फैज़

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही..

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही..

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....

न तन में खून फराहम न अश्क आँखों में
न तन में खून फराहम न अश्क आँखों में
नमाजे शौक को वाजीब है बेहुजुर सही...
नमाजे शौक को वाजीब है बेहुजुर सही...
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....

किसी तरह तो जमे बज्म मयकदे वालों
किसी तरह तो जमे बज्म मयकदे वालों
नहीं जो वादा ओ सागर तो हावू ही सही
नहीं जो वादा ओ सागर तो हावू ही सही
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....

गर इन्तेजार कठिन है तो जब तलक ऐ दिल
गर इन्तेजार कठिन है तो जब तलक ऐ दिल
किसी के वादे ऐ फर्दा की गुफ्तगू ही सही
किसी के वादे ऐ फर्दा की गुफ्तगू ही सही......
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....

दयार गैर में महरम अगर नहीं कोई
दयार गैर में महरम अगर नहीं कोई
तो फैज़ जिक्र वतन अपने रूबरू ही सही
तो फैज़ जिक्र वतन अपने रूबरू ही सही ...
नहीं विसाल मय असर तो आरजू ही सही

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....
नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू सही....

- फैज़