Saturday, December 5, 2009

होरी होये रही है


होरी होये रही है
अहमद जीयो के द्वार 
हज़रत अली का रंग बना है
हसन हुसैन खिलार
ऐय्सो होरी की धूम मची है 
चहुँ और पड़ी है पुकार
ऐय्सो अनोखो चतुर
खिलाडी
रंग दिनयों संसार
निअज़ प्यारा भर भर  छिडके
एक ही रंग सस पिचकार

जी चाहे  तो  शीशा  बन  जा , जी  चाहे  पैमाना  बन  जा
शीशा  पैमाना  क्या  बनना , मय  बन  जा  मयखाना  बन  जा ..

मय  बन  कर , मयखाना  बन  कर  मस्ती  का  अफसाना  बन  जा
मस्ती  का  अफसाना  बनकर  हस्ती  से  बेगाना  बन  जा

हस्ती  से बेगाना  होना  मस्ती  का  अफसाना  बनना
इस  होने  से  इस  बनने  से  अच्छा  है  दीवाना  बन  जा

दीवाना बन  जाने  से  दीवाना  होना  अच्छा  है
दीवाना  होने  से  अच्छा  खाक -ऐ -दर -ऐ -जानाना  बन  जा

खाक -ऐ  -दर -ऐ  -जानाना  क्या  है  अहले  दिल  की  आँखों   का  सुरमा
शमा  के  दिल  की  ठंडक  बन  जा  नूर -ऐ -दिल -ऐ -परवाना  बन  जा

सीख  ज़हीन  के  दिल  से  जलना  काहे  को  हर  शम्मा  पर  जलना
अपनी  आग  में   खुद  जल  जाये  तू  ऐसा  परवाना  बन  जा

- हज़रत  शाह  नियाज़  
http://www.radioreloaded.com/tracks/?22554
मनम अन नियाझ मंदी के बे तू नियाझ दारम
ग़मे चूं तो नाझनीनी बेह्झार नाझ दारम
तुई ही आफताब ऐ चश्मम बा जमाल तुस्त रोशन
अगर अझ तो बाझगीरम बाके चश्मे बाझ दारम
- रूमी
( हात पसरून तुझ्याकडे एक देणं मागतो आहे मी, तू दे एक वेदना, ती आहे मला हज़ार लेण्यांसारखी... तूच आहेस सूर्य माझा, माझी नजर प्रकाशलेली तेजाने तुझ्या.....जर मी नजर दूर फिरवली तुझ्यापासून, तर कोणाला परत पाहू मी?)
यार को हमने जा-ब-जा देखा
कही जाहिर कही छुपा देखा
कही मुमकिन हुआ कही वाजिब
कही फानी कही वफ़ा देखा
कही वो बादशाह-ए-तख़्तनशीन
कही कासा लिए गदा देखा
कही वो दर-लिबास-ए-माशुका
बर सरे नाझ और अदा देखा
कही आशिक नियाझ की सूरत
सीना बरियान-ओ-दिलजला देखा
- हजरत शाह नियाज़

Wednesday, December 2, 2009

साकियाँ जाए कहाँ हम तेरे मयखाने से
शहर के शहर नजर आते है वीराने से...
ये जो कुछ लोग नजर आते है दीवाने से
इनको मतलब है न साकी से न पैमाने से...
जोड़ कर हाथ ये साकी है गुजारिश मेरी
मुझको आखों से पिला, गैर को पैमाने से...
मुझको आते हुए तो नासिर सबने देखा,
देखा जाते हुए न किसीने मुझे मयखाने से....
( शायर- हकीम नासिर)

सूना है लोग


सूना  है  लोग  उसे  आँख  भर  के  देखते  हैं 
सो  उस  के  शहर  में  कुछ  दिन  ठहर  के  देखते  हैं 

सूना  है  बोल  तो  बातों  से  फूल  झरते  हैं 
ये  बात  है  तो  चलो  बात  कर  के  देखते  हैं 

सूना  है  रात  उसे  चाँद  तकता  रहता  है 
सितारे  बाम -ए -फलक  से  उतर  के  देखते  हैं 

सूना  है  दिन  को  उसे  तितलियाँ  सताती  हैं 
सूना  है  रात  को  जुगनू  ठहर  के  देखते  हैं 

सूना  है  रब्त  है  उसको  खराब  हालों  से 
सो  अपने  आप  को  बर्बाद  करके  देखते  हैं 

सूना  है  दर्द  की  ग़ाहक  है  चश्म -ए -नाज़  उसकी 
सो  हम  भी  उसकी  गली  से  गुज़र  कर  देखते  हैं 

अब  उसके  शहर  में  ठहरें  के  कुछ  कर  जाएँ
"फ़राज़" आओ  सितारे  सफ़र  के  देखते  हैं

-अहमद फ़राज़

असद

आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक

आशकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब
दिलका क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक

हमने माना के तगाफुल ना करोगे लेकिन
खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक


फर्तब ए खुर से शबनम को फ़ना की तालीम
मैं भी हूँ एक इनायत की नजर होने तक

गम ए हस्ती का 'सद' किससे हो जुज्मर्ग इलाज
शम्मा हर रंग जलती है सहर होने तक

- असद ग़ालिब



http://www.youtube.com/watch?v=ih6BTkJ1Ujc&feature=related
http://www.youtube.com/watch?v=pOUktERIIZo
http://www.youtube.com/watch?v=wLhUuLmtl4A

Sunday, November 29, 2009

काश....

काश ऐसा कोई मंजर होता..
काश ऐसा कोई मंजर होता..
मेरे काँधे पे तेरा सर होता...
काश ऐसा कोई मंजर होता..
मेरे काँधे पे तेरा सर होता..
काश ऐसा कोई मंजर होता..

जमा करता जो मैं आये हुए संग
जमा करता जो मैं आये हुए संग
सर छुपाने के लिए घर होता..
सर छुपाने के लिए घर होता..
मेरे काँधे पे तेरा सर होता...
काश ऐसा कोई मंजर होता..

इस बलंदी पे बहोत तनहा हूँ
तनहा हूँ
बहोत तनहा
तनहा तनहा 
इस बलंदी पे बहोत तनहा हूँ
काश मैं सब के बराबर होता..
काश मैं सब के बराबर होता..
मेरे काँधे पे तेरा सर होता...
काश ऐसा कोई मंजर होता..


उसने उलझा दिया दुनिया में मुझे
उसने उलझा दिया दुनिया में मुझे
वरना इक और कलंदर होता..
वरना इक और कलंदर होता..
मेरे काँधे पे तेरा सर होता...
काश ऐसा कोई मंजर होता..


मेरे काँधे पे तेरा सर होता...
काश ऐसा कोई मंजर होता..
काश....

Wednesday, November 25, 2009

खुसरौ


जिहाल  -ए  मिस्कीं  मकुन  तगफुल,
दुराये नैना बनाये बतियाँ
की  ताब  -ए  हिज्राँ  नदारम  ए  जाँ ,
न ले हो काहे लगाये छतियाँ

चो  शमा  सोज़ान  चो  ज़र्रा  हैरान,
हमेशा  गिरियाँ  बे  इश्क  आन  मह
न नींद नैना न अंग चैना
न आप ही आवें न भेजें पतियाँ

 
यकायक  अज  दिल  बसद  फरेबम 
 बबुर्द  चशमश  -ए  करार्र  तस्कीं 


किसे पड़ी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियाँ

शबान  -ए  हिज्राँ  दराज़  चुन  ज़ुल्फ़
व  रोज़  -ए  वसलत  चो  उम्र  कोताह
सखी पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ

बहक्क  -ए   रोज़  -ए  विसाल  -ए  दिलबर
की  दाद  मरा  ग़रीब  खुसरौ
सपत मन के वराए राखूँ
जो जाए पाऊँ पिया के खतियाँ 


Sunday, November 22, 2009

नजीर अकबराबादी

जब फागुन रंग झमकते हो
तब देख बहारें होली की.. तब देख बहारें होली की...
जब फागुन रंग झमकते....
परियों के रंग दमकते हो
खुम शीशे जाम छलकते हो
मेहबूब नशे में छकते हो
जब फागुन रंग झमकते हो.. जब फागुन रंग झमकते हो...

नाच रंगीली परियोंका
कुछ भीगी तानें होली की
कुछ तबले खड़के रंग भरें
कुछ घूंगरुं ताल छनकते हो
जब फागुन रंग झमकते हो.. जब फागुन रंग झमकते हो...

मुलाल गुलाबी आँखें हो
और हाथों में पिचकारी हो.....
उस रंग भरी पिचकारी को
अंगिया पर तककर मारीं हो
सीनों से रंग ढलकते हो
तब देख बहारें होली की..   
जब फागुन रंग झमकते हो.. जब फागुन रंग झमकते हो...


-नजीर अकबराबादी

छाप तिलक सब छिनी रे  मोसे नैना मिलायके
प्रेम भटी का मधवा पिलायके मतवारी करे
मोसे नैना मिलायके
बल बल जाऊ मैं तोरे रंग रिजवा अपनी सी रंग दीनी रे
छाप तिलक सब छिनी रे  मोसे नैना मिलायके
खुसरो निजाम बल बल जाइये मोहे सुहागन की भीनी रे
मोसे नैना मिलायके
छाप तिलक सब छिनी रे  मोसे नैना मिलायके

Sunday, November 15, 2009

गालिब

यह न थी हमारी किस्मत, के विसाल- ए- यार होता
अगर और जीते रहते, तो यही इंतज़ार होता

तेरे वादे पर जीये हम, तो यह जान झूट जाना
के ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता

तेरी नाज़ुकी से जाना, के बंधा था इहेद बड़ा
कभी तू न तोड़ सकता, अगर ऊस्तुवार होता

कोइ मेरे दिल से पूछे, तेरे तीर- ए- नीमकश को
ये खलिश कहाँ से होती, जो जिगर के पार होता

ये कहाँ की दोस्ती है, के बने हैं दोस्त नासेह
कोइ चारासाज़ होता, कोइ ग़मगुसार होता

रग- ए- संग से टपकता, वो लहू कई फिर न थमता
जिसे ग़म समझ रहे हो, ये अगर शरारह होता

ग़म अगरचेह जान गुलिस है, पर कहाँ बचाएँ के दिल है
ग़म- ए- इश्क गर न होता, ग़म- ए- रोज़गार होता

कहूँ किस से मैं के क्या है, शब् -ए -ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता

हुए मर के हम जो रुसवा, हुए क्यों न गर्क- ए- दरिया
न कभी जनाजा उठता, न कहीं मजार होता

उसे कौन देख सकता, के यगाना है वो यकता
जो दूई की बू भी होती, तो कहीं दो चार होता

ये मसाल- ए- तसव्वुफ़, ये तेरा बयान 'गालिब '
तुझे हम वली समझते, जो न बादा ख्वार होता

मेरे हमनफस मेरे हम नवाँ


 मेरे हमनफस मेरे हम नवाँ मुझे दोस्त बनके दगा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-इश्क से जान वलब, मुझे जिंदगी की दुआ न दे


मेरे दाग-ए-दिल से है रोशनी, उसी रोशनी से है जिंदगी
मुझे डर है अए चारागर, ये चराग तू ही बुझा न दे


कभी जाम लब पे लगा दिया कभी मुस्कुराके हटा दिया
तेरे छेड़-छाड़ में साथिया, मेरी तशनगी को बढ़ा न दे



मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर, तेरा क्या भरोसा है चारागर
ये तेरी नवाजिश-ए-मुख्तसर, मेरा दर्द और बढ़ा न दे


मेरा अज़्म इतना बलंद है के पराये शोलों का डर नहीं
मुझे खौफ आतिशे गुल से है, ये कहीं चमन को जला न दे


वो उठे हैं लेके होम-ओ-सुब्बू, अरे ओ 'शकील'  कहाँ है तू
तेरा जाम लेने को बज्म में कोई और हाथ बढ़ा न दे




-'शकील'

Wednesday, November 4, 2009

साहिर होशियारपुरी

कौन  कहता  है  मोहब्बत  की  ज़ुबाँ  होती  है ..
यह  हकीकत  तो  निगाहों  से  बयाँ  होती  है

वो  न  आये  तो  सताती  है  खलिश  सी  दिल  को ..
वो  जो  आये  तो  खलिश  और  जवाँ होती  है

रूह  को  शाद  करे  दिल  को  जो  पुरनूर  करे ..
हर  नज़ारे  में  ये  तनवीर  कहा  होती  है

जब्त -ए -सहरापे  मोहब्बत  को  कहा  तक  रोके ..
दिल  में  जो  बात  हो  आँखों  से  अयाँ  होती  है

ज़िन्दगी  एक  सुलगती  सी  चिता  है  साहिर ..
शोला  बनती  है  ना  ये  बुझके  धुवाँ  होती  है

कौन  कहता  है  मोहब्बत  की  ज़ुबाँ  होती  है ..
यह  हकीकत  तो  निगाहों  से  बयाँ  होती  है

- साहिर होशियारपुरी



मराठी रुपांतर


कोण बोलत आहे की प्रेमाचं बोलण शक्य होत आहे 
ही सत्यता तर नजरेच्या प्रत्यंतरात शक्य होत आहे

ते नाही आले तर छळत असते सल हृदयाला
ते जर आले तर सलाला अजून चिरतारुण्य शक्य होत आहे

आत्माला प्रसन्नित करेन हृदयाला जो तेजोमय करेन 
प्रत्येक दृश्यात अशी प्रकाशमानता कुठे शक्य होत आहे

शुष्क-सहनशीलतेत प्रेमाला कुठवर थोपवावे
हृदयामध्ये जी गोष्ट असते डोळ्यांतून शक्य होत आहे

जीवन एक धुमसणारी चिता आहे 'साहीर'
आग बनत आहे न हे विझून धूर शक्य होत आहे

-साहिर होशियारपुरी

Thursday, October 29, 2009

आहिस्ता -आहिस्ता

सरकती जाए हैं रुख से नकाब आहिस्ता -आहिस्ता
निकलता रहा है आफताब आहिस्ता -आहिस्ता

जवान होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा
हया यकलख्त आई और शबाब आहिस्ता -आहिस्ता

सब - -फ़ुर्कत का जागा हूँ परिस्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता -आहिस्ता

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फर्क है इतना
इधर तो जल्दी जल्दी है उधर आहिस्ता -आहिस्ता

सवाल--वस्ल पर उनके उदू का खौफ है इतना
दबे होंठो से देते हैं जवाब आहिस्ता -आहिस्ता

वो बड़ी बेदर्दी से सर काटे 'अमीर' और मैं कहूं उनसे
हुजुर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता -आहिस्ता



-अमीर




मराठी रूपांतर

सरकत जात आहे चेहराहून मृगसाज सावकाश सावकाश
निघत येत राहत आहे गगनराज सावकाश सावकाश
 




तरुण होऊ लागले जेव्हा ते तर आमच्याशी करून घेतला पडदा
लाज अचानक आली आणि तारुण्य सावकाश सावकाश
 



विरहाच्या युगांपासून जागा आहे दूतांनो आता तरी निजू दया
कधी सवलती मध्ये करून घ्या हिशेब सावकाश सावकाश



माझ्या आणि तुझ्या प्रेमामध्ये बस फरक आहे इतकाच
इकडे तर घाई घाई आहे तिकडे सावकाश सावकाश
 



मिलनाच्या प्रश्नावर त्यांच्या प्रतिस्पर्ध्याचे सावट आहे इतकं
दबकत ओठांनी देत आहेत उत्तर सावकाश सावकाश



ते मोठ्या निर्दयतेने शिर सरसावून 'अमीर' आणि मी बोलू त्यांच्यांशी
यजमान सावकाश सावकाश श्रीमान सावकाश सावकाश
 



-अमीर

Tuesday, October 27, 2009

आदमी आदमी से मिलता हैं

आदमी आदमी से मिलता हैं
दिल मगर कम किसीसे मिलता हैं..

भूल जाता हूँ मैं सितम उसके
वो कुछ इस सादगी से मिलता हैं..

आज क्या बात है के फुलोंका
रंग तेरी हँसी से मिलता हैं..

मिलके भी जो कभी नहीं मिलता
टूट कर दिल उसीसे मिलता हैं..

रूह को भी मजा मोहबत का
दिल की हमसाएगी से मिलता हैं..

सिलसिला फितन--क़यामत का
तेरी खुश-क़ीमती से मिलता हैं..

कारोबारें जहाँ सँवरते हैं..
होश जब बेखुदी से मिलता हैं..

Tuesday, October 20, 2009

ना सवाल बनके मिला करो..




ना सवाल बनके मिला करो.. ना जवाब बनके मिला करो..
मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है..
मुझे ख्वाब बनके मिला करो..

ना सवाल बनके मिला करो.. ना जवाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

अरे शाम को मेरे दोस्तों ना अजाब बनके मिला करो..
अरे शाम को मेरे दोस्तों ना अजाब बनके मिला करो..
मुझे मैकदे में मिलो अगर तो शराब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

मुझे अच्छे लोग बहोत मिलें, मैं तो उनके क़र्ज से मर गया
मुझे अच्छे लोग बहोत मिलें, मैं तो उनके क़र्ज से मर गया
अरे हो सके तो कभी कभी तो ख़राब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

अभी तो सोचना हैं तो सोच लो, अभी छोड़ना हैं तो छोड़ दो..
अभी तो सोचना हैं तो सोच लो, अभी छोड़ना हैं तो छोड़ दो..
नये मौसमों में मिलो मुझे तो गुलाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

ना तो इस तरह से मिला करो, ना तो उस तरह से मिला करो..
ना तो इस तरह से मिला करो, ना तो उस तरह से मिला करो..
हाँ हुजूर बनके मिला करो..हाँ जनाब बनके मिला करो
ना सवाल बनके मिला करो..
ना जवाब बनके मिला करो..

मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब है.. 
मुझे ख्वाब बनके मिला करो..

ना सवाल बनके मिला करो..ना जवाब बनके मिला करो..
ना सवाल बनके मिला करो..

Saturday, October 17, 2009

कुछ तो दुनिया की


कुछ तो दुनिया की

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया
और कुछ तल्ख़ी--हालात ने दिल तोड़ दिया

हम तो समजे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया

दिल तो रोता रहे और ऑंख आंसू बहे
इश्क की ऐसी रवायात ने दिल तो़ड़ दिया

वो मेरे हैं मुझे मिल जायेंगे जायेंगे
ऐसे बेकार ख़यालात ने दिल तोड़ दिया

आप को प्यार है मुझसे के नहीं है मुझसे
जाने क्यूँ ऐसे सवालात ने दिल तोड़ दिया

हम तो समजे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया...

- सुदर्शन फाकीर

Sung By - Begum Akhtar
Lyrics By - Sudarshan Faakir





मराठी रूपांतर

कुठल्याश्या जगाच्या कृपांनी हृदय तोडून दिले
आणि कुठल्या परिस्थितीच्या कटूतांनी हृदय तोडून दिले

मी तर समजलो होतो की वर्षावात बरसेल मदिरा
आला वर्षा ऋतू तर वर्षावांनी हृदय तोडून दिले

हृदय तर रडत राहे आणि डोळे अश्रू न वाहवे
प्रेमाच्या अश्या सामांजस्यांनी हृदय तोडून दिलं

ते माझे आहे मला मिळून जातील येऊन जातील
अश्या निरथर्क विचारांनी हृदय तोडून दिले

आपल्याला प्रेम आहे माझ्याशी की नाही आहे माझ्याशी
काय माहित अश्या प्रश्नचिन्हांनी हृदय तोडून दिले

मी तर समजलो होतो की वर्षावात बरसेल मदिरा
आला वर्षा ऋतू तर वर्षावांनी हृदय तोडून दिले

कुठल्याश्या जगाच्या कृपांनी हृदय तोडून दिले ....


- सुदर्शन फाकीर

Tuesday, October 13, 2009

ढूँढोगे अगर मुल्कों मुल्कों

ढूँढोगे अगर मुल्कों मुल्कों, मिलने के नहीं नायाब हैं हम
ताबीर
है जिसकी हसरत गम, हमनफ़सो वो ख्वाब हैं

दर्द बता कुछ तू ही पता, अब तक ये मुअम्मा हल हुआ
हम
मे हैं दिल बेताब निहाँ, या आप दिल बेताब हैं हम

मैं
हैरत हसरत का मारा, खामोश खड़ा हूँ साहिल पर
दरिया
मोहब्बत कहता है, कुछ भी नहीं पायाब हैं हम

लाखों
ही मुसाफिर चलते हैं, मंजिल पे पहुँचते हैं दो एक
अहले जमाना कदर करो, नायाब ना हों कामयाब हैं हम

मुर्गान
क़फ्श को फूलों ने, 'शाद' ये क्या कहला भेजा है
जाओ जो तुम को आना हो, ऐसे मे अभी शादाब हैं हम

-शाद अज़ीमाबादी




मराठी रुपांतर


या संपूर्ण गझलेला आणखी निराळा अर्थ अभिप्रेत आहे, मी या गझलेचा स्वैर अनुवाद तर केला आहे पण तुम्हाला तो निराळा अर्थ काय अभिप्रेत असेल, यासाठी Comments मध्ये तो अवश्य शोधायचा आहे.....

शोधाल जर प्रदेशा-प्रदेशांत, भेटण्यास नाही अप्राप्त आहे मी
स्वप्नफळ
आहे ज्याचे व्यथित इच्छांत, हे मित्रांनो ते स्वप्न आहे मी

यातना सांग काही तूच ठाव, अजून पर्यंत गूढ उलगडून नाही झालेलं
माझ्यात
आहे व्याकुळ हृदय सुप्त, कि आपलं व्याकुळ हृदय आहे मी

मी
विस्मयकारी वासनांनी मेलेलो, शांत उभा आहे किनाऱ्यावर
प्रेमाचा
प्रवाह सुनावतोय, ये ना कसाही नाही उथळ आहे मी !

लाखोंत
प्रवासी चालत आहे, सर्वोच्च ठिकाणी पोहचत आहेत दोन एक
हे
सन्मानित जगा आदर राखा, अप्राप्य हो विजेता आहे मी

पक्ष्याच्या
वहाणांना फुलांनी, शाद ही काय नक्षी पाठवली आहे
येऊन
जा जर तुम्हाला यायचे असेल, अशात आता ताजातवाना आहे मी

-
शाद अझीमाबादी

या संपूर्ण गझलेला आणखी निराळा अर्थ अभिप्रेत आहे, तो निराळा अर्थ काय अभिप्रेत असेल, यासाठी Comments मध्ये तो अवश्य प्रकट करायचा आहे. मी आपल्या प्रतिसादासाठी प्रतीक्षा करतोय.......

Saturday, October 3, 2009

तनहा.. तनहा.. मत सोचा कर.


तनहा.. तनहा.. मत सोचा कर.

तनहा तनहा मत सोचा कर..
मर जायेगा मर जायेगा.. मत सोचा कर..

प्यार घडी भर का ही बहोत है..
झुटा.. सच्चा.. मत सोचा कर...

जिसकी फ़ितरत ही डंसना हो..
वो तो डंसेगा मत सोचा कर..

धुप में तनहा कर जाता
क्यूँ यह साया मत सोचा कर..

अपना आप गवाँ कर तुने,
पाया है क्या मत सोचा कर

राह कठिन और धूपे कडी है
कोन आयेगा मत सोचा कर..

ख्वाब, हकीकत या अफसाना
क्या है दुनिया मत सोचा कर

मूँद ले आँखें और चले चल....
मंजिल रास्ता.. मत सोचा कर

दुनिया के गम साथ हैं.. तेरे
खुद को तनहा, मत सोचा कर

जी ना, दोबहर हो जायेगा
जानां. इतना मत सोचा कर

मान मेरे शहजाद वगरना
पछताएगा मत सोचा कर...


-फरहत शहजाद