आखिर कब तक..
मय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर..
आखिर कब तक..
सोचा है अब पार उतरेंगे या टकरा कर डूब मरेंगे..
तूफानों की जद पे सफिना कब तक आखिर..
आखिर कब तक..
एक महीने के वादे पर साल गुजरा फिर भी ना आये..
वादे का ये एक महिना कब तक आखिर..
आखिर कब तक..
सामने दुनिया भर के गम है और इधर इक तनहा हम है..
सैकड़ों पत्थर इक आइना कब तक आखिर..
आखिर कब तक..
Sunday, May 29, 2011
सांवरे तोरे बिन जिया जाए ना..
सांवरे तोरे बिन जिया जाए ना.. जलूं तेरे प्यार में करूँ इंतज़ार तेरा.. किसी से कहाँ जाए ना...
याद तिहारी मोरा मन तडपाए सारी रैना नींद ना आए..
बिरहाकी मारी देखूं राह निहारें दो नैनों के दीप जलाए..जलूं तेरे प्यार में करूँ इंतज़ार तेरा.. किसी से कहाँ जाए ना...
सांवरे तोरे बिन जिया जाए ना..
डूब चलें मेरी आस के तारें कैसे पहुचूँ पी के द्वारें टूट गएँ सब संग सहारें डोले नैयाँ दूर किनारें..जलूं तेरे प्यार में करूँ इंतज़ार तेरा.. किसी से कहाँ जाए ना...
सांवरे तोरे बिन जिया जाए ना..
Wednesday, May 11, 2011
जलवा ब कद्र ए ज़र्फ़ ए नज़र देखते रहे
क्या देखते हम उनको मगर देखते रहे
अपना ही अक्स पेश ए नज़र देखते रहे
आइना रु ब रु था जिधर देखते रहे
उनकी हरीम ए नाज़ कहाँ और हम कहाँ
नक्श ओ निगार ए पर्दा ए दर देखते रहे
ऐसी भी कुछ फ़िराक की रातें गुज़र गयीं
जैसे उन्ही को पेश ए नज़र देखते रहे
हर लहजा शान ए हुस्न बदलती रही जिगर
हर आन हम जहाँ ए दीगर देखते रहे
वो निराला तर्ज़ -ए -पयाम था जो सुखन की हद से गुज़र गया
वो हर एक लफ्ज़ मैं चाँद था वो हर एक हर्फ़ मैं नूर था
वो चमकते मिसरों का अक्स था जो ग़ज़ल में खुद ही संवर गया
जो लिखूं तो नोक -ए -कलम पे वो , जो पढ़ूं तो नोक -ए -जुबां पे वो
मेरा जौक भी मेरा शौक भी मेरे साथ साथ निखर गया
Thursday, January 6, 2011
फैसला तुमको भूल जाने का
एक नया ख्वाब है दीवाने का
दिल कली का लरज लरज उठा
जिक्र था फिर बहार आने का
हौसला कम किसी में होता है
जीत कर खुद ही हार जाने का
जिंदगी कट गई मनाते हुए
अब इरादा है रूठ जाने का
आप शहजाद की ना फिक्र करें
वो तो आदि है जख्म खाने का
- शहजाद
Saturday, January 1, 2011
सावन बीतो जाये पिहरवा ...
सावन बीतो जाये पिहरवा ...
मन मेरा घबराए..
ऐसो गए परदेस पिया तुम..
ऐसो गए परदेस पिया तुम.. चैन हमें नहीं आये..
मोरा सैयां मोसे बोले ना..
मोरा सैयां मोसे बोले ना..मैं लाख जतन कर हारी
मैं लाख जतन कर हार रहीं
मोरा सैयां मोसे बोले ना..मोरा सैयां मोसे बोले ना..
तू जो नहीं तो ऐसे पिया हम..
तू जो नहीं तो ऐसे पिया हम...जैसे सुना आंगना
जैसे सुना आंगना.. नैन तिहारी राह निहारें..
नैन तिहारी राह निहारें.. नैन को तरसयों ना
मोरा सैयां मोसे बोले ना..
मोरा सैयां मोसे बोले ना..मैं लाख जतन कर हारी
मैं लाख जतन कर हार रहीं
आप गैरोंकी बात करते है..
हमने अपने भी आजमाए है
लोग काँटों से बच के चलते है
हमने फूलों से जख्म खाए है
किस का क्या जो कदमों पर जब इन्हें बंदगी रख दी
हमारी चीज़ थी हमने जानी वहा रख दी
जो दिल माँगा तो वो बोले के ठहरो याद करने दो
जरा सी चीज़ थी हमने खुदा जाने कहा रख दी
संग हर शख्श ने उठाया रखा है
जब से तु ने मुझे दीवाना बना रखा है
निगाह नाज़ से पूछेंगे किस दिन यह जहीन ...तू ने क्या क्या न बनाया तो ये क्या क्या न बना
उसके दिल पर भी कड़ी इश्क में गुजरी होगी
नाम जिसने भी मुहब्बत का सजा रखा है
आ पिया मोरे नैन में...मैं पलक ढाँक तोहे लूँ... ना मैं देखूं और को और न तोहे देखन दूँ
पत्थरों.. आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो
दुनिया बड़ी बावरी पत्थर पूजने जाये..घरकी चक्की कोई न पूजे जिसका पिसा खाए
मैंने तुमको भी कभी अपना खुदा रखा है
अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाई है
तुने क्या मुझके मुहब्बत में बना रखा है
नदी किनारे धुँआ उठे मैं जानू कुछ होय..जिस कारन मैं जोगन बनी कही वो ही न जलता होय..
पि जा अय्याम की कल्बी को भी हसके नासीर
हम को सहने में भी कुदरत ने मजा रखा है
जब से तु ने मुझे दीवाना बना रखा है............
Thursday, November 11, 2010
वह सूरतें इलाही किस देस बस्तियाँ है..
अब जिनके देखनेको आँखे तरस्तियाँ है..
बरसात का तो मौसम कब का निकल गया पर
मिजगां की यह घटायें अब तक बरस्तियाँ है..
क्यों कर ना हो यह ज़ख्मी शीशा सा दिल हमारा
उस शौक की निगाहें पत्थर में धस्तियाँ है..
कीमत में उनकी गो हम दो जुग को दे चुके है..
उस यार की निगाहें किस पर भी सस्तियाँ है..
जब मैं कहा यह उसे सौदा को अपने मिलके..
इस साल तू है साकी और मैं परस्तियाँ है..
Monday, October 4, 2010
वो जो हम में तुम में करार था , तुम्हें याद हो के न याद हो
वही यानी वादा निबाह का , तुम्हें याद हो के न याद हो
वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे पेश्तर , वो करम के हाथ मेरे हाल पर
मुझे सब हैं याद ज़रा ज़रा , तुम्हें याद हो के न याद हो
वो नए गिले वो शिकायतें , वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना , तुम्हें याद हो के न याद हो
कोई बात ऎसी अगर हुई जो तुम्हारे जी को बुरी लगी
तो बयां से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो के न याद हो
सुनो ज़िक्र है कई साल का , कोई वादा मुझ से था आप का
वो निबाहने का तो ज़िक्र क्या , तुम्हें याद हो के न याद हो
कभी हममें तुम में भी चाह थी , कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आशना , तुम्हें याद हो के न याद हो
हुए इत्तेफाक से गर बहम , वो वफ़ा जताने को दम -बा -दम
गिला -ए-मलामत -ए -अर्क़बा , तुम्हें याद हो के न याद हो
कभी बैठे सब हैं जो रू -ब-रू तो इशारतों ही से गुफ्तगू
वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो के न याद हो
वो बिगड़ना वस्ल की रात का , वो न मानना किसी बात का
वो नहीएँ नहीं की हर आन अदा , तुम्हें याद हो के न याद हो
जिसे आप गिनते थे आशना जिसे आप कहते थे बावफ़ा
मैं वही हूँ "मोमिन "-ए -मुब्तला तुम्हें याद हो के न याद हो
Saturday, September 18, 2010
किसको कातिल मैं कहूँ किसको मसीहा समझूँ..
सब यहाँ दोस्त ही बैठे है किसे क्या समझूँ...
वो भी क्या दिन थे के हर वहम यकीन होता था...
अब हकीक़त नज़र आये तो उसे क्या समझूँ..
दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उठे..
ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूँ..
जुल्म यह है के है यकता तेरी बेगानारवी
लुफ़्त यह है के मैं अब तक तुझे अपना समझूँ...
Video _ http://www.youtube.com/watch?v=TSJlQWhC-dc&feature=player_embedded#!
गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी... यह नजराना तेरा भी है और मेरा भी...
अपने गमको गीत बनाकर गा लेना.. अपने गमको गीत बनाकर गा लेना.. राग पुराना तेरा भी है... मेरा भी.. राग पुराना तेरा भी है.. मेरा भी.. गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...
तू मुझको और मैं तुझको समझाऊ क्या.. तू मुझको और मैं तुझको समझाऊ क्या.. दिल दीवाना तेरा भी है.. मेरा भी.. दिल दीवाना तेरा भी है.. मेरा भी.. गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...
शहर में गलियों-गलियों जिसका चर्चा है.. शहर में गलियों-गलियों जिसका चर्चा है.. वो अफसाना तेरा भी है.. मेरा भी..
मयखाना की बात ना कर वाइज मुझसे.. आना-जाना तेरा भी.. मेरा भी.. गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...
यह नजराना तेरा भी है और मेरा भी... गम का खजाना तेरा भी है.. मेरा भी...
Sunday, August 22, 2010
तुझ लब की सिफत, लाल-ऐ-बदक्शासु कहूँगा..
जादू है तेरे नैन, जादू है तेरे नैन गज़लासु कहूँगा..
देखा हूँ तुझे ख्वाब में ऐ माया-ऐ-ख़ुबी
इस ख्वाब को जा उसफ-ऐ-तहनासु कहूँगा..
मुझ पर ना करो जुल्म तुम ऐ लैल-ऐ-खूबा
मजनू हूँ तेरे गम को बयाबासु कहूँगा..
एकनुक्ता तेरे सफा-ऐ-रुख पर नहीं बेजां
इस मुख को सफा-ऐ-ख़ुरासु कहूँगा..
http://www.youtube.com/watch?v=OrrjQi0uS0o
Sunday, July 25, 2010
तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे.. कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
होठों के पास आये हसीं क्या मजाल है..दिल का मुहमल्ला है कोई दिललगी नहीं जख्म पे जख्म खा के ज़ी अपने लहू के घुट प़ी.. आह ना कर लबों को स़ी..इश्क है दिललगी नहीं
दिल लगाकर पता चलेगा तुम्हें ...आशकी की दिललगी नहीं होती..
कुछ खेल नहीं है इश्क की लाग....पानी न समझ है आग है आग
खूँ रुलाएगी यह लगी दिलकी..खेल समझो न दिललगी दिलकी यह इश्क नहीं आसाँ.. बस इतना समझ लीजिये..इक आग का दरया है..और डूब के जाना है
तुम्हें दिललगी भूल जानी पड़ेगी.....मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो..तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे..कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
Saturday, July 17, 2010
मेरे दिल में तेरी यादों के साए
हवा जैसे खंडहर में सरसराए
हम ही ने सब के गम को अपना जाना
हम ही ने सब के हाथों जख्म पाए
दिल-ए-बेताब की उस्तअद तो देखो
ज़माने भर के इसमें गम समाए
किसीने प्यार से जब भी पुकारा
तो पलकों पर सितारे झिलमिलाए
शब्-ए-फ़ुर्कत हविक आहट पे मुझको
यही धोखा हुआ शायद वो आए
ख़ुशी दी है ज़माने भर को इमदाद
अगरचे उम्रभर आँसू बहाए
जब तक बिका न था....
जब तक बिका न था.. तो कोई पूछता न था
जब तक बिका न था तो कोई पूछता न था
तुने मुझे खरीद कर... अनमोल कर दिया
आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला
आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला
दिल जिससे मिल गया वो दुबारा नहीं मिला
आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला
दिल जिससे मिल गया वो दुबारा नहीं मिला...आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला...............
हम अंजुमन में सब की तरफ देखते रहे
हम अंजुमन में सब की तरफ देखते रहे
हम अंजुमन में सब की तरफ देखते रहे....अपनी तरह से कोई अकेला नहीं मिला
अपनी तरह से कोई अकेला नहीं मिला........
दिल जिससे मिल गया वो दुबारा नहीं मिला...आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला...........
जो मैं ऐसा जानती.......
जो मैं ऐसा जानती प्रीत की दुख होय
नगर ढंढोरा पिटती.....
नगर ढंढोरा पिटती प्रीत न करियो कोय
आवाज को तो कौन समझता की दूर दूर
आवाज को तो कौन... समझता की दूर दूर.......
खामोशियों का दर्द शनासा नहीं मिला
................खामोशियों का दर्द शनासा नहीं मिला...
दिल जिससे मिल गया वो दुबारा नहीं मिला...आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला.................
कच्चे घड़े ने जीत ली....जीत ली.......
कच्चे ...कच्चे..कच्चे...कच्चे घड़े ने जीत ली
कच्चे घड़े ने जीत ली नदी चढ़ी हुई...
मजबूत कश्तियों को किनारा नहीं मिला..
मजबूत कश्तियों को किनारा नहीं मिला....
दिल जिससे मिल गया वो दुबारा नहीं मिला...आँधी चली तो नक़्शे-कफ़-ए-पा नहीं मिला.............
रहता नहीं संग कोई सदा...... जाने वफ़ा है मुझको पता ... दो चार लम्हा रहो तुम रूबरू..... दिल तुमसे कहना यही चाहता ......
कुछ देर तक...... कुछ दूर तक.......... तो साथ चलो................
माना जिंदगी है तनहा सफ़र..... इल्तजा यही है जाने जिगर
कुछ देर तक...... कुछ दूर तक.......... तो साथ चलो..........
साथ चलो..........
कुछ देर तक...... कुछ दूर तक.......... तो साथ चलो....
Friday, June 18, 2010
मैं नज़र से पी रहा हूँ, ये समां बदल न जाए
न उठाओ तुम निगाहें, कहीं रात ढल न जाए
अभी रात कुछ है बाकि, न उठा नकाब साकी
तेरा रिंद गिरते गिरते, कहीं फिर संभल न जाए
मेरे जिंदगी के मालिक, मेरे दिल पे हाथ रख दे
तेरे आने के ख़ुशी में, मेरा दम निकल न जाए
मेरे अश्क भी है इस में, जो शराब बन रही है मेरा जाम छूने वाले, तेरा हाथ जल न जाए
मैं बना करू नशेमन किसी शाख-ए-गुल्सिता पे कहीं साथ आशियाँ के, ये चमन भीजल न जाए
Wednesday, June 9, 2010
आहट सी कोई आये तो लगता है की तुम हो साया कोई लहराए तो लगता है की तुम हो
जब शाख कोई हाथ लगाते ही चमन में शरमाए लजत जाए तो लगता है की तुम हो
रस्ते के धुंधलके में किसी मोड़ पे कुछ दूर.. इक लव सी चमक जाए तो लगता है की तुम हो
संदल से महकती हुई कुर्बेफ़ हवा का झोंका कोई टकराए तो लगता है की तुम हो
ओढ़े हुए तारों की चमकती हुई चादर नदिया कोई बलखाये तो लगता है की तुम हो
जब रात कोई देर किरन मेरे बराबर चुपचाप से सो जाए तो लगता है की तुम हो
- जान निसार अख्तर
Friday, May 7, 2010
क्या टूटा है.... अन्दर अन्दर, क्यों चेहरा कुम्हलाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर, क्यों चेहरा कुम्हलाया है
तनहा तनहा रोने वालो, कौन तुम्हे याद आया है........... क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
चुपके चुपके सुलगे रहे थे, याद में उनकी दीवाने..
एकतारे में टूट के यारो...... एकतारे में टूट के यारो....क्या उनके समझाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
रंगबरंगी इस महफ़िल में... रंगबरंगी इस महफ़िल में, तुम क्यों इतने चुपचुप हो भूल भी जाओ पागल लोगो.... भूल भी जाओ पागल लोगो.... क्या खोया क्या पाया है..... क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
शेर कहा है खून है दिल का .... शेर कहा है खून है दिल का, जो लफ्जों में बिखरा है शेर कहा है खून है दिल का......जो लफ्जों में बिखरा है..
दिल के जख्म दिखा कर हमने दिल के जख्म दिखा कर हमने..महफ़िल को गरमाया है.............. क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो... वो इतना बेदर्द नहीं अब 'शहजाद' ये झूट ना बोलो, वो इतना बेदर्द नहीं
अपनी चाहत को भी परखो.. अपनी चाहत को भी परखो, गर इम्जाम लगाया है
क्या टूटा है अन्दर अन्दर...क्यों चेहरा कुम्हलाया है
तेरी हर चाप से जलते हैं ख्यालों में चिराग
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
तुझको छू लूं तो फिर ऐ जाँ ए तमन्ना मुझको
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबु आये
तू बहारों का है उनवान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर मेरी जाँ तुझे चाहूँगा
जिंदगी में तो सभी प्यार किया करते है
Sunday, March 7, 2010
कोई दोस्त है ना रकीब है
तेरा शहर कितना अजीब है
वो जो इश्क था वो जूनून था
ये जो हिज्र है ये नसीब है
यहाँ किसका चेहरा पढ़ा करूँ
यहाँ कौन इतना करीब है
मैं किसे कहूँ मेरे साथ चल
यहाँ सबके सर पे सलीब है
तुझे देखकर मैं हूँ सोचता
तू हबीब है या रकीब है
-राना साहरी
Friday, March 5, 2010
तेरे आने का धोखा सा रहा है
दिया सा रात भर जलता रहा है
अजब है रात से आँखों का आलम
ये दरिया रात भर चढ़ता रहा है
सुना है रात भर बरसा है बादल
मगर वो शहर जो प्यासा रहा है
वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
किसे ढून्दोगे इन गलियों में 'नासिर'
चलो अब घर चले दिन जा रहा है
-नासिर
Sunday, February 28, 2010
प्यार भरे दो शर्मीले नैन... जिनसे मिला मेरे दिल को चैन
कोई जाने ना... क्यूँ मुझसे शरमाए... कैसे मुझे तडपाए...
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
दिल ये कहे गीत मैं तेरे गाऊ.. तू ही सुने और मैं गाता जाऊ..
तू जो रहे साथ मेरे ..दुनिया को ठुकराऊ.. तेरा दिल बहलाऊ..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
रूप तेरा कलियों को शरमाए.. कैसे कोई अपने दिल को बचाए..
पास है तू ..फिर भी जलूँ कौन तुझे समझाए..सावन बीता जाए..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...
डर है मुझे तुझसे बिछड़ ना जाऊ..खो के तुझे मिलने की राह न पाऊ..
ऐसा ना हो ..जब भी तेरा ...नाम लबों पर लाऊ.. मैं आंसू बन जाऊ..
प्यार भरे दो शर्मीले नैन...जिनसे मिला मेरे दिल को चैन
कोई जाने ना... क्यूँ मुझसे शरमाए... कैसे मुझे तडपाए...
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
धुल के निकलेगी अभी चश्म ए महताब से रात
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है ....
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
और मुश्ताक निगाहों की सुनी जाएगी
और मुश्ताक निगाहों की सुनी जाएगी
और उन हाथों से मस होंगे ये तरसे हुए हाथ
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है....
उनका आँचल है के रुखसार के पैराहन है
उनका आँचल है के रुखसार के पैराहन है
कुछ तो है जिस से हुई जाती है चिलमन रंगीन
जाने उस ज़ुल्फ़ की मौहूम घनी छावओं में
टिमटिमाता है वो आवेज़ा अभी तक के नहीं
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है....
आज फिर हुस्न ए दिलारा की वही धज होगी
आज फिर हुस्न ए दिलारा की वही धज होगी
वोही ख्वाबीदा सी आँखें वोही काजल की लकीर
रंग ए रुखसार पे हल्का सा वो गाजे का गुबार
संदली हाथ पे धुंधली सी हिना की तहरीर
अपने अफ़्कार की अशआर की दुनिया है यही
जाने मज़मून है यही शाहिदे माना है यही
अपना मौजू -ए -सुखन इनके सिवा और नहीं
तब्बा शायर का वतन इनके सिवा और नहीं
यह खूँ की महक है के लबे यार की खुशबू
यह खूँ की महक है....
यह खूँ की महक है के लबे यार की खुशबू
किस राह की - जानिब से सबा आती है देखो
गुलशन में बहार आई....
गुलशन में बहार आई के जिंदा हुआ आबाद
किस संद से नगमों की सदा आती है देखो
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
धुल के निकलेगी अभी चश्म ए महताब से रात
गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम
गुल हुई जाती है.....
यूँ... जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में....
इक रोशनी अंधेरों में बिखरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में....
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूँ, कितनी अजब थी सूरते हालात क्या कहूँ
वो कहर वो गज़ब वो जफा मुझको याद है,
वो उसकी बेरुखी की अदा मुझको याद है,
मिटता नहीं है जहेन से यूँ छा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
पहले वो मुझको देखकर बरहम सी हो गई,
पहले..वो मुझको देखकर बरहम सी हो गई, फिर अपने ही नसीब खयालों में खो गई
बेचारगी पे मेरे उसे रहम आ गया,
शायद मेरे तड़पने का अंदाज भा गया,
सांसों से भी करीब मेरे आ गया कोई...
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
अब उस गिले तबाह की हालत ना पूछिये,
अब उस गिले तबाह की हालत ना पूछिये, बेनाम आरजू की लजत ना पूछिये
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया,
इक हादसा था प्यार का उनवान बन गया,
मंजिल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई...
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई..
यूँ जिंदगी की राहों में....
इक रोशनी अंधेरों में बिखरा गया कोई
यूँ जिंदगी की राहों में टकरा गया कोई
कालें कालें बादल छायें... देखि देखि जी ललचाये ....
कालें कालें बादल छायें.... देखि देखि जी ललचाये .... कैसे आऊ पास तिहारे ... दुरी गए मोरे साजन
कैसे आऊ पास तिहारे ... दुरी गए मोरे साजन.....
......दुरी गए मोरे साजन...
भीगा भीगा मौसम आया .... पिया का संदेसा लाया...
भीगा भीगा मौसम आया .... पिया का संदेसा लाया...मनिवा को चैन न आवैं ... तरसें है मोरे नैना
मनिवा को चैन न आवैं ... तरसें है मोरे नैना
... तरसें है मोरे नैना .........